Durga Amritwaani4 : vidhipurvak jot Lyrics
दुर्गा अमृतवाणी 4 – विधि पूर्वक जोत विधि पूर्वक जोत जलाकर माँ चरणन में ध्यान लगाकरजो जन मन से पूजा करेंगे जीवन-सिन्धु सहज तरेंगे कन्या रूप में जब दे दर्शन….
दुर्गा अमृतवाणी 4 – विधि पूर्वक जोत विधि पूर्वक जोत जलाकर माँ चरणन में ध्यान लगाकरजो जन मन से पूजा करेंगे जीवन-सिन्धु सहज तरेंगे कन्या रूप में जब दे दर्शन….
दुर्गा अमृतवाणी 3 – जगदम्बा जगतारिणी जगदम्बा जगतारिणी जगदाती जगपालइसके चरणन जो हुए उन पर होए दयाल माँ की शीतल छाँव में स्वर्ग सा सुखहोयेजिसकी रक्षा माँ करे मार सके….
दुर्गा अमृतवाणी 1 – मंगलमयी भय मोचिनी मंगलमयी भय मोचिनी दुर्गा सुख की खानजिसके चरणों की सुधा स्वयं पिये भगवान दुःखनाशक संजीवनी नवदुर्गा का पाठजिससे बनता भिक्षुक भी दुनिया का सम्राट अम्बा….
दुर्गा अमृतवाणी 2: दुर्गा माँ दुःख हरने वाली दुर्गा माँ दुःख हरने वालीमंगल मंगल करने वालीभय के सर्प को मारने वालीभवनिधि से जग तारने वाली अत्याचार पाखंड की दमिनीवेद पुराणों….