गायत्री मंत्र लिरिक्स हिंदी में
ॐ भूर्भुवः स्व तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात ॥
ॐ भूर्भुवः स्व तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात ॥
ॐ भूर्भुवः स्व तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात ॥
ॐ भूर्भुवः स्व तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात ॥
हिन्दी में भावार्थ
उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अपनी अन्तरात्मा में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।
गायत्री मंत्र का उच्चारण दैनिक अनुष्ठानों में भी किया जाता है। हिन्दू धर्म शास्त्रों में अलग अलग भगवानो को प्रसन्न करने के लिए अलग अलग मंत्र बताए गए है। लेकिन गायत्री मंत्र एक ऐसा मंत्र है जिसका जाप करने से इंसान के जीवन में आ रही सभी परेशानियां दूर हो जाती है।
गायत्री मंत्र जाप करने का तरीका : हिन्दू धर्म में किसी भी भगवान की पूजा या हवन जैसे कामो में गायत्री मंत्र का जाप किया जाता है। गायत्री मंत्र का जाप दिन के किसी भी समय कर सकते है लेकिन सुबह इस मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इसीलिए सुबह जल्दी उठ कर स्नान करके साफ कपड़ें पहन लें। फिर एक साफ आसन बिछा कर अपने सामने एक चौकी पर साफ कपडा बिछा लें।चौकी के ऊपर माँ गायत्री की फोटो या मूर्ति रख लें। माता के सामने घी का दीपक और धूप बत्ती जला दें। फिर माता को पुष्प, फल और मिठाई अर्पित करें। गायत्री माता की आरती और चालीसा पढ़ें।उसके बाद हाथ में तुलसी की माला लेकर ऊपर बताए गए मंत्र का जाप 108 बार करें। नियमित इस मंत्र का जाप करने से आपके जीवन में आ रही सभी बाधाएं माँ गायत्री की कृपा से जल्द दूर हो जाती है।
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